लाइफस्टाइल

सेवा में , माननीय प्रधानमंत्री जी भारत सरकार नयी दिल्ली । विषय : कोविड-19 के इलाज के संदर्भ में । महोदय, कोविड-19 के विरुद्ध संघर्ष में आपके प्रयासों एवं इस संघर्ष में प्राणपण से जुटे चिकित्सकों, उनके सहयोगियों का हम हृदय की गहराई से नमन-वंदन करते हैं। मेरी धारणा है कि कोविड-19 के इलाज में यदि एलोपैथिक चिकित्सा के साथ होम्योपैथिक चिकित्सा को भी सम्मिलित कर लिया जाय तो मृत्यु-दर 0% हो जायेगी । वर्तमान में, एलोपैथिक चिकित्सा-पद्धति में, 60 से भी अधिक औषधियों का ट्रायल चल रहा है फिर भी किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सका है । ट्रायल, इरर एवं लर्निंग के सिद्धांत पर रिसर्च चल रहा है जो निर्विवाद रुप से, मानवता के कल्याण हेतु सराहनीय है। महोदय, होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति, अपने देश की एक मान्यता प्राप्त चिकित्सा पद्धति है जो डायनेमिक धरातल पर काम करती है, जबकि एलोपैथिक एवं आयुर्वेदिक औषधियां मटेरियल धरातल पर काम करती हैं । यहां मैं आपका ध्यान एलोपैथिक एवं होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धतियों के आधारभूत संरचना की ओर आकृष्ट करना चाहूंगा :- एलोपैथिक पद्धतिक में एंटीवायरल ड्रग आज की तारीख तक नहीं ढूंढा जा सका है। बस वैक्सीन बनाकर इससे बचा जा सकता है। जबकि होम्योपैथिक में वायरल डिजीज का सफलतापूर्वक इलाज किया जाता है। वैक्सीन का सिद्धांत:- वैक्सीन द्वारा शरीर में, एस्टेरायल(वंध्याकृत) बैक्टीरिया या वायरस डाले जाते हैं। जिसको मारने के लिए शरीर एंटीबॉडी बनाने लगता है । एस्टेरायल बैक्टीरिया/ वायरस में वंश-वृद्धि नहीं होती जो बाद में स्वत: मर जाते हैं। लेकिन उस बैक्टीरिया/वायरस से लड़ने वाली एंटीबॉडी का शरीर में एक लंबी फौज का निर्माण हो जाता है। वहीं, होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति में शरीर में व्याप्त रोग के सदृश ही औषध जनित कृतिम रोग पैदा किया जाता है। कृत्रिम रोग, शरीर में व्याप्त रोग को नष्ट कर देता है तथा बाद में कृत्रिम रोग (जो बहुत सूक्ष्म होता है) स्वत: नष्ट हो जाता है। इस प्रक्रिया में, शरीर रोग से मुक्त होकर निरोगी हो जाता है। असाध्य एवं कठिन बीमारियों में एलोपैथिक के साथ क्या होम्योपैथिक औषधि दी जा सकती है?ऐसे शोध वर्ष 1985 में, दक्षिण भारत में किए जा चुके हैं। इस शोध में मरीजों को 2 वर्ग में बांटा गया ।प्रथम वर्ग में 500 मरीजों को एलोपैथिक चिकित्सा पर तथा दूसरी वर्ग में500 मरीजों को एलोपैथिक कम होम्योपैथिक चिकित्सा पर रखा गया । प्रथम वर्ग एलोपैथिक चिकित्सा में रखे गए मरीजों में से कुछ मरीज स्थिति बिगड़ गई जबकि एलोपैथिक-कम- होम्योपैथिक चिकित्सा में रखे गये सभी मरीज ठीक हो गये । इसी तर्ज पर होम्योपैथिक को ट्रायल के तौर पर ही सही, मानवता के कल्याण में होम्योपैथिक की भी आहुति स्वीकार की जा सकती है । महोदय, आप सदा से नयी संभावनाओं की तलाश तथा नवोन्मेष में विश्वास रखते हैं, इसलिए आपसे आग्रह करने का मन बना ।यहां प्रश्न किसी चिकित्सा पद्धति की नहीं बल्कि मानवता की रक्षा कैसे की जाए? मृत्यु दर पर नियंत्रण कैसे हो? मरने वाले को कैसे बचाया जाय? सामूहिक एवं पवित्र प्रयास कैसे किया जाए ? प्रश्न इसका है। यह मेरे मन के विचार है। आपसे मैंने साझा किया। आप युगपुरुष है। आपके संरक्षण में मैं भी सुरक्षित हूं। पूरा देश सुरक्षित है। नमन वंदन अभिवादन के साथ, डॉ. गणेश प्रसाद अवस्थी 9415689993 धुन्धीकटरा , मिर्जापुर उत्तर प्रदेश- 231001 सेवानिवृत्त होम्योपैथिक चिकित्सा अधिकारी उत्तर प्रदेश सरकार पूर्व संयोजक -आई.एच.ओ.(इंडियन होम्योपैथिक ऑर्गेनाइजेशन) उत्तर प्रदेश

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