संपादकीय

रात बरसात की

बड़ी बेरहम होती है वो रात बरसात की जो बरसती है मुफ़लिस के टूटे छप्पर पर जो न सुहाती है किसी मुसाफिर को कभी बढ़ाती है दर्द जो इश्क़ में टूटे हुए दिलों का पूँछ के देखो कभी हालात उस बेघर परिंदे से बड़ी मनहूस होती है वो रात बरसात की। अरमान होती है किसी […]

मनोरंजन

जिंदगी ही तो है

इतना क्यों जीते हो डर डर के बेमतलब जिंदगी ही तो है,कोई समंदर थोड़े ही है खतम तो होना ही है कोई अम्बर थोड़े ही है चाहे जियो दिन चार,पर जिंदगियां हों उसमें हज़ार हर पल हो इतना बड़ा जिसमें समाए जीवन सारा मुझे मत बताओ ये उलझन ये मुश्किल तुम इंसान ही तो हो […]

मनोरंजन

आदमी

जिंदगी की उधेड़ बुन में उलझा हुआ सपनों के बाजार में खड़ा वो आदमी अपनी मेहनत की जेब में पड़े हुए कुछ औक़ात के सिक्कों को गिन रहा है कौन सा सपना सस्ता और कौन सा है महँगा क्या खरीद ले जाएगा आज वो घर अपने और सजा देगा अपनों की पलकों पर और क्या […]